शिक्षा में भारतीयता
‘भारतीयता क्या है?’ इस विषय पर विचार करने के बाद व्यावहारिक विषय यह है कि इन सिद्धान्तों को शिक्षा व्यवस्था में प्रत्यक्ष कैसे उतारा जाएँ? राष्ट्रीयता, विश्वबन्धुत्व, सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता, परस्पर पूरकता जैसे गुण शिक्षा के माध्यम से छात्रों के जीवन का अंग कैसे बन सकते हैं? इस पर कार्य करना शिक्षण मंडल का प्राथमिक कार्य है। इसका विचार हम 4 बिन्दुओं में करेंगे। शिक्षा का उद्देश्य, नीति, पाठ्यवस्तु तथा पद्धति— सभी में भारतीयता को परिलक्षित करना होगा।
शिक्षा के चार आयाम
शिक्षा का उद्देश्य
भारतीयता के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत नहीं होता। विश्व-कल्याणकारी राष्ट्र-निर्माण के लिए समाज-गठन हेतु तत्पर सुयोग्य नागरि...
शिक्षा की नीति
विकेन्द्रित, स्वावलम्बी, समाजाधारित, स्वायत्त शिक्षा व्यवस्था का विकास यथार्थ में सदा से ही भारतीय शिक्षा की नीति का आधार रहा है। शिक्षा ...
पाठ्यक्रम
प्राथमिक शिक्षा से प्रारम्भ कर उच्च शिक्षा तक सभी पाठ्यक्रमों का आधार भारतीय विचार हो। प्रत्येक विषय में भारतीय परम्परा का समावेश हो। भार...
शिक्षा की प्रविधि
नीति व पाठ्यक्रम के सुव्यवस्थित होने से पहले भी शिक्षा की प्रविधि में भारतीयता का अमल किया जा सकता है। शिक्षा का वातावरण भारतीय हो। वाताव...
सप्तसूत्र (सात मूल मंत्र)
इन्हीं सप्तसूत्रों के माध्यम से मण्डल में समाज-जागरण का कार्य किया जाता रहा है। अब इनमें से 4-5 सूत्रों हेतु विशेष संगठन कार्य कर रहे हैं। उनके साथ समन्वय का कार्य शिक्षण मण्डल में आवश्यक है।