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बी.एस.एम. भारत

शिक्षण मंडल
मण्डल के बारे में

परिचय

स्थापना तिथि

रामनवमी

चैत्र शुक्ल नवमी (वर्ष 5071 / 27 मार्च, 1969)

पंजीकरण संख्या

F-1738

मुंबई चैरिटी आयुक्त

वैचारिक अधिष्ठान

भारत की सांस्कृतिक, दार्शनिक व ऐतिहासिक धरोहर से प्रेरित वैश्विक जीवन दृष्टि।

एकात्मता

सर्वं खल्विदं ब्रह्म

संवेदनशीलता

सर्वे भवन्तु सुखिनः

न्यूनतम आवश्यकता

तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा:

परिपूर्णता

योगः कर्मसु कौशलम्

संगठन

YUGABDA 5127
०१

राष्ट्रीय पुनरुत्थान हेतु विद्यार्थी, शिक्षक, संस्थाचालक एवं शिक्षा में रुचि रखने वाले बंधु-भगिनियों का राष्ट्रीय, वैचारिक एवं शैक्षणिक संगठन।

०२

भारत के वैचारिक अधिष्ठान को विश्वव्यापी बनाने हेतु ‘योग्य बौद्धिक योद्धा’ तैयार करने वाला अखिल भारतीय संगठन।

०३

समर्थ, समृद्ध, समरस व श्रेष्ठ भारत के निर्माण हेतु भारतीय जीवन दृष्टि से प्रेरित व भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली का सृजन करने वाला संगठन।

भारतीय शिक्षण मंडल शिक्षा में पुनः भारतीयता को प्रतिष्ठित करने में कार्यरत एक राष्ट्रीय, वैचारिक एवं शैक्षिक संगठन है, जिसकी स्थापना चैत्र शुक्ल नवमी युगाब्द 5071 (27 मार्च1969) को रामनवमी के पावन अवसर पर की गई। शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय जीवन-दृष्टि को पुनर्स्थापित करना शिक्षण मंडल का मूल उद्देश्य है।

भारतीय शिक्षण मंडल मात्र एक संगठन नहीं, अपितु राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत, जीवंत एवं जागृत विचार-प्रवाह है, जो भारत की सनातन ज्ञान संपदा और सांस्कृतिक चेतना से अनुप्राणित है।

शैक्षिक नवोत्थान और स्वदेशी चिंतन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ,भारतीय शिक्षण मंडल ने भारतीय शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। भारतीय शिक्षण मंडल एक ऐसे भारत की पुनर्रचना में संलग्न है जो भारतीय जीवन-दृष्टि से परिपूर्ण, आध्यात्मिक रूप से समृद्ध तथा आत्मनिर्भर हो।

भारतीय शिक्षण मंडल के उदय की जड़े बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक काल से जुड़ी हैं, जब भारत स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला में तप रहा था। ऐसे में, राष्ट्र की आत्मा राजनैतिक के साथ-साथ सांस्कृतिक और बौद्धिक स्वतंत्रता की भी आकांक्षी थी। अतः, हमें एक ऐसे सशक्त, आत्मनिर्भर और भारत के मूल स्वरूप से जुड़ी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता थी, जो न केवल ज्ञान प्रदान करे, अपितु भारतीय जीवन-दृष्टि, परंपराओं और मूल्य-बोध से भी सिंचित हो। तभी, राष्ट्र के दूरदर्शी चिंतकों, शिक्षाविदों और मनीषियों ने एक ऐसे संगठन की परिकल्पना की, जो भारत को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर, उसे भारतीय जड़ों से जोड़ते हुए पुनः जीवंत करे। इसी ध्येय के साथ भारतीय शिक्षण मंडल की स्थापना हुई।

प्रारंभिक वर्षों में संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने, उसे राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने,तथा भारत के आत्म-चिंतन के अनुरूप शिक्षा नीति के निर्माण हेतु राष्ट्र व्यापी जन-जागरण का कार्य किया। गत वर्षों में शिक्षण मंडल ने शिक्षकों के उन्नयन, पाठ्यक्रम निर्माण, अनुसंधान, भारतीय भाषाओं, लोकज्ञान, पारंपरिक कलाओं, तथा विज्ञान और दर्शन को शिक्षा में सम्मिलित करने की दिशा में एक अहम भूमिका निभाई है। अतएव, भारतीय शिक्षण मंडल एक ऐसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संवाहक बनकर उभरा है,जो भारत को उसकी मूल चेतना से पुनः जोड़ने हेतु सतत प्रयासरत है।

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