मंडल
कार्यपद्धति – मंडल
‘मंडल’ भारतीय शिक्षण मंडल की प्राथमिक एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण इकाई है। यह शिक्षा में रुचि रखने वाले बंधु-भगिनियों के लिए शिक्षा को समझने एवं संबंधित समस्याओं पर समाधानमूलक चर्चा करने हेतु एक मंच है। मंडल का उद्देश्य मात्र विचार-विनिमय नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की दिशा में शिक्षा के औपचारिक और अनौपचारिक दोनों पक्षों पर विचार करना है।
मंडल द्वारा कार्यकर्ताओं में संगठन भावना, समर्पण, संकल्प तथा वैचारिक सामंजस्य को सुदृढ़ करते हुए ‘भारतीय कार्यसंस्कृति’ को पोषित किया जाता है। एक मंडल में अधिकतम 20 व्यक्तियों की सूची होनी चाहिए तथा मंडल संचालन हेतु न्यूनतम 4 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है। प्रत्येक मंडल को चार बातों का विशेष ध्यान रखना होता है: नियमित संचालन, सामूहिक सहभागिता, समाधान मूलक चर्चा और अभिलेखन। मंडलों का आयोजन शैक्षणिक संस्थानों में, कार्यकर्ताओं के निवास स्थान अथवा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर किया जाता है।
क्या?
- भारतीय शिक्षण मंडल की प्राथमिक एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण इकाई।
- शिक्षा में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए शिक्षा संबंधी विषयों पर गहन समझ और रचनात्मक चर्चा का एक समर्पित मंच।
- प्रत्येक मंडल में आदर्श रूप से अधिकतम २० प्रतिभागी होने चाहिए, जिनकी स्पष्ट रूप से प्रलेखित और अद्यतन सूची हो।
- मंडल के संचालन के लिए न्यूनतम ४ सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।
- नियमित संचालन, सामूहिक सहभागिता, समाधानमूलक चर्चा एवं विस्तृत अभिलेखन अनिवार्य है।
क्यों?
- समर्पित कार्यकर्ताओं का विकास और संगठनात्मक संस्कृति का निर्माण करना।
- प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं के माध्यम से भारतीय कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना।
- शैक्षिक परिवर्तन के एक प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य करना।
- प्रतिभागियों के बीच महत्वपूर्ण और रचनात्मक शैक्षणिक सोच को प्रोत्साहित करना।
- शिक्षा के सभी क्षेत्रों में भारतीय दृष्टिकोण की स्थापना को सुदृढ़ करना।
कहाँ?
- शैक्षणिक या शोध संस्थानों में
- कार्यकर्ता के निवास स्थान पर
- किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर